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Showing posts from April, 2024

माँ चंद्रघंटा: शांति और शक्ति की देवी

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हिंदू पौराणिक कथाओं और आध्यात्मिकता के क्षेत्र में, मां चंद्रघंटा शक्ति, शांति और अनुग्रह के प्रतीक के रूप में प्रतिष्ठित हैं। देवी दुर्गा की तीसरी अभिव्यक्ति के रूप में, वह उग्रता और करुणा दोनों का प्रतीक हैं, जिससे वह भक्तों के बीच एक पूजनीय व्यक्ति बन जाती हैं। मां चंद्रघंटा का नाम उनके माथे पर घंटे के समान शोभा पाने वाले अर्धचंद्र से लिया गया है। उसे दस भुजाओं के साथ चित्रित किया गया है, प्रत्येक में एक हथियार या दैवीय शक्ति का प्रतीक है। उसका रंग सुनहरा रंग बिखेरता है, जो शुभता और पवित्रता का प्रतीक है। एक राजसी बाघ पर सवार होकर, वह निडरता और दृढ़ संकल्प का परिचय देती है, अपने भक्तों में साहस पैदा करती हैं। उनकी सवारी साहस, वीरता और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है I मां चंद्रघंटा की पूजा करने से भक्तों में बाधाओं को दूर करने और अपने प्रयासों में सफलता प्राप्त करने के लिए साहस और आत्मविश्वास का संचार होता है I नवरात्रि के शुभ त्योहार के दौरान, भक्त उत्सव के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा करते हैं।  मां चंद्रघंटा अपनी शक्ति और शांति के मिश्रण से दुनिया भर में लाखों भक्तों

Eid-ul-Fitr: A Time for Celebration, Reflection, and Renewal

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As the crescent moon appears, signaling the end of the holy month of Ramadan, Muslims around the world eagerly anticipate the joyous occasion of Eid-ul-Fitr . This year it is believed that the festival of Eid will be celebrated with great pomp on 11th April . This festival, known as the "Festival of Breaking the Fast," holds profound significance in Islam, marking the culmination of a month-long journey of spiritual growth, self-discipline, and devotion. Eid-ul-Fitr is a time for celebration, reflection, and renewal, as believers gather to express gratitude, seek forgiveness, and strengthen bonds of community. The Spiritual Journey of Ramadan: Ramadan, the ninth month of the Islamic lunar calendar, is a period of fasting, prayer, and introspection. Muslims abstain from food, drink, and other physical needs from dawn until sunset, focusing instead on spiritual reflection, self-discipline, and acts of worship. Throughout Ramadan, believers strive to deepen their connection wit

माँ ब्रह्मचारिणी - अर्थ और कथा

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   'ह्रीं श्री अम्बिकायै नमः' मां दुर्गा  हिंदू धर्म की प्रमुख देवी , कथा के अनुसार , माता भगवती दुर्गा ने महिषासुर नामक असुर के साथ 9 दिन तक युद्ध किया और फिर नवमी की रात्रि को वध किया। आप सभी को नवरात्रि और नववर्ष की हार्दिक हार्दिक शुभकामनाएं। नवरात्रि - मां दुर्गा की शक्ति को समर्पित नवरात्रि का व्रत करते हुए 9  स्वरूपों की पूजा की जाती हैं। आज हम बात करेंगे द्वितीय दिवस में पूजी जाने वाली माता ब्रह्मचारिणी देवी जो तप की , त्याग ,सदाचार और संयम की वृद्धि हैं I इनकी कहानी कुछ ऐसी हैं की सती माता जो शिव की धर्मपत्नी हैं , उनके मृत्यु के बाद उन्होंने देवी पार्वती के रूप में पुनर्जन्म लिया हिमायल की बेटी बन कर जिससे वो महादेव को गहरे तप से बाहर ला सके और विवाह कर सके। नियति यह थी को उन दोनो को जो भी संतान होगी वहीं ताडिका सूर राक्षस का वध करती जिसने तीनों लोको में हाहाकार मचा रखा था । पुनर्जन्म होने के कारण पार्वती को कुछ ज्ञात नही था। एक बार नारद मुनि हिमालय पर्वत से गुज़र रहे थे तब उनकी नजर माता पार्वती  पर पड़ी और वे तुरंत नीचे आये और उन्हें अपने  अस्तित्व के बारे में बताया

चैत्र नवरात्रि प्रथम तिथि

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ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः चैत्र नवरात्रि आरंभ हो चुके हैं । प्रत्येक वर्ष चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रथम तिथि पर नवरात्रि की कलश स्थापना होती है। साथ ही नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा उपासना की जाती है ।  मां दुर्गा अपने पहले स्वरुप में शैलपुत्री के नाम से पूजी जाती हैं। वह पर्वतराज हिमालय की पुत्री थी, इसलिए  इनका नाम शैलपुत्री पड़ा।  "हिमालय को कोई हिला नहीं सकता "उसी तरह ,जब हम भक्ति का रास्ता चुनते हैं तो हमारे मन में भी भगवान के लिए द्रिढ़ विश्वास होना चाहिए, तभी हम अपने लक्ष्य तक पहुंच सकते हैं। यही कारण है कि नवरात्र के पहले दिन शैलपुत्री की पूजा की जाती है। माँ शैलपुत्री का नाम पार्वती भी है। इनका विवाह भगवान शिव से हुआ था। मां शैलपुत्री का वास उत्तर प्रदेश की काशी नगरी में माना जाता है। वहां शैलपुत्री का एक बेहद प्राचीन मंदिर है  जिसे नवरात्र के सभी नौ दिन दुल्हन की तरह सजाया जाता है। कहा जाता है कि माता शैलपुत्री यहाँ स्वयं विराजमान हैं। उस मंदिर के सेवादार पंडित अच्छेलाल गोस्वामी जी  ने बताया कि माँ शैलपुत्री बचपन से ही भगवान शिव के प्रति बहुत आस्