ईरान में बड़ा साइबर अटैक — सरकारी न्यूज चैनल हैक, देश में हड़कंप
ईरान (Iran) में एक बड़ा साइबर हमला (Cyber Attack) हुआ है, जिसने देश की सरकार के नियंत्रण वाले टीवी चैनल और मीडिया प्रणालियों को निशाना बनाया है। इस हमले ने न केवल देश के डिजिटल इंफ़्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा पर प्रश्न खड़े किए हैं, बल्कि राजनीतिक अस्थिरता व विरोध प्रदर्शनों के बीच और भी बड़ी बहस छेड़ दी है।
हैक क्या हुआ?
ईरान के सरकारी state television / IRIB (Islamic Republic of Iran Broadcasting) चैनल के सैटेलाइट प्रसारण को हैक कर लिया गया।
हैकर्स ने चैनल के प्रसारण को रोककर अपनी सामग्री दिखा दी — जिसमें रजा पहलवी (Reza Pahlavi), ईरान के निर्वासित शाह के बेटे, के संदेश और विरोध प्रदर्शन की फुटेज शामिल थीं।
प्रसारण लगभग 10 मिनट तक हुआ और यह ईरान के भीतर लाखों घरों तक पहुंचा।
हैक किए गए संदेश का मतलब
हमले के दौरान दिखाए गए संदेश में:
✔ सुरक्षा बलों से अपील कि वे हथियार न उठाएँ और जनता के साथ खड़े हों।
✔ रजा पहलवी के वीडियो क्लिप, जिन्होंने विरोध प्रदर्शनों का समर्थन किया और लोगों से जारी संघर्ष जारी रखने का आह्वान किया।
इसका मकसद सरकारी नैरेटिव को चुनौती देना और लोगों के बीच विरोध भावना को और तेज़ करना बताया जा रहा है।
क्या हालात ऐसे बने?
ईरान में सरकारी टेलीविजन और मीडिया कई विरोध प्रदर्शनों के बीच पहले से ही तनावपूर्ण माहौल का हिस्सा बन चुके हैं।
इंटरनेट शटडाउन और व्यापक ब्लैकआउट के बीच जनता तक सही जानकारी पहुँचने में कठिनाइयाँ हैं।
हसाइबर हमले ने यह दिखाया कि सरकारी सिस्टम भी संगठित डिजिटल हमलों के प्रति असुरक्षित हैं, खासकर जब विरोध आंदोलन तेज़ हो।
साइबर सुरक्षा और इसलिए चिंता
इस घटना ने कुछ गंभीर सवाल खड़े किए हैं:
क्या देश की महत्वपूर्ण डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर्याप्त सुरक्षित थी?
क्या विरोध के दौरान यह हमला दूर से या अंदर से मदद से किया गया?
क्या ऐसे साइबर हमले भविष्य में बढ़ेंगे, खासकर राजनीतिक उथल-पुथल के समय?
इन सवालों का जवाब अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुआ है, लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि आधुनिक युद्धों में साइबर हमले भी वास्तविक प्रभाव पैदा करते हैं।
ईरान में हाल ही में हुआ यह साइबर अटैक सिर्फ एक तकनीकी घटना नहीं है — यह राजनीतिक संघर्ष, विरोध और नियंत्रण की लड़ाई का एक नया रूप बन गया है।
सरकारी टीवी चैनल के हैक होना, विरोध आंदोलनों के बीच सूचना नियंत्रण के बिगड़ते संतुलन और सरकार की डिजिटल सुरक्षा चुनौतियों पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।
ईशा झा
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