बिहार राजनीति
बिहार (Bihar) की राजनीति हमेशा से सीधी नहीं बल्कि जटिल रही है, जहां जाति, गठबंधन और नेताओं की छवि सबसे बड़ा रोल निभाती है। 1990 के दशक में Lalu Prasad Yadav और उनकी पार्टी Rashtriya Janata Dal (RJD) का दबदबा रहा, जिसमें MY (मुस्लिम-यादव) समीकरण बहुत मजबूत था। इसके बाद 2005 में Nitish Kumar उभरे और उन्होंने Janata Dal United (JDU) के साथ मिलकर “सुशासन” की राजनीति को आगे बढ़ाया। इस दौरान Bharatiya Janata Party (BJP) उनके साथ गठबंधन में रही, लेकिन मुख्यमंत्री की कुर्सी हमेशा Nitish Kumar के पास ही रही।
असल में BJP बिहार में लंबे समय तक “जूनियर पार्टनर” की भूमिका में रही। 2005 से लेकर 2013 और फिर 2017 के बाद भी जब-जब सरकार बनी, Nitish Kumar ही CM बने। BJP ने कई चुनावों में अच्छा प्रदर्शन किया, जैसे 2020 में 74 सीटें जीतना, लेकिन फिर भी गठबंधन की शर्तों के कारण मुख्यमंत्री पद JDU को ही मिला। इसके अलावा बिहार की जातीय राजनीति—जैसे RJD का MY समीकरण और JDU का कुर्मी-अति पिछड़ा वोट बैंक—ने BJP को अकेले बहुमत पाने से रोके रखा। Nitish Kumar का बार-बार NDA और महागठबंधन के बीच आना-जाना भी BJP के लिए सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौती बन रहा है।
लेकिन धीरे-धीरे हालात बदलने लगे। BJP ने बिहार में बूथ स्तर तक संगठन मजबूत किया, नए नेताओं को आगे बढ़ाया और युवा व शहरी वोटरों में अपनी पकड़ बनाई। Nitish Kumar की बार-बार बदलती राजनीतिक चालों से जनता के बीच अस्थिरता की भावना भी बढ़ी। इसी बीच BJP ने अपनी “लंबी रणनीति” पर काम करते हुए खुद को इतना मजबूत कर लिया कि अब वह किसी पर निर्भर नहीं रहना चाहती थी। यही वजह है कि 14 अप्रैल 2026 को पहली बार स्थिति ऐसी बनी कि BJP का मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हुआ।
~गोविंद
BJMC (2 SEMESTER)
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