Prominent anchor Ms Aasha Jha working in News 24 visited HIMCOM campus and gave basic Journalism tips to its students. Students were very delighted about meeting her. Influensive Personality was happy to see young India.
आज हम बात कर रहे है उन नकारात्मक ऊर्जाओं कि जिनका अस्तित्व दुनिया में मौजूद है । भूत जिसका अर्थ है बीता हुए कल ,जो चीज़े बीत जाती है वो सिर्फ यादे बनकर रह रहती है ।कभी - कभी बीती हुई चीज़े हमारे सामने इस प्रकार आती है कि वह हमें अंदर से और बाहर से भी डरा कर चली जाती है। कहते हैं कई बार हम आत्माओं को देख नहीं सकते पर हम उन्हें महसूस कर सकते हैं। दुनिया रहस्य से भरी है किसी एक का रहस्य पता लगाते लगाते हम किसी अन्य रहस्य पर पहुंच जाते हैं। जैसे समय रुक नहीं सकता वैसे ही दुनिया में कई अनेक ऐसी चमत्कारी चीजें हैं जिनकी गिनती नहीं है । जहां हम भगवान पर विश्वास करते है वहीं कहीं न कहीं हम शैतान जैसी बातों से रूबरू होते है । विज्ञान इतनी तरक्की कर चुका है लेकिन वह आज तक इन जादुई चीजों का पता नहीं लगा पाया है जहां विज्ञान कहता है उर्जा कभी खत्म नहीं हो सकती वह किसी ना किसी रूप में स्थिर हो जाती है। हर सिक्के के 2 पहलू होते हैं अगर दुनिया में सकारात्मक ऊर्जा है तो नकारात्मक जरूर होगी। डर एक ऐसा शब्द है या फिर एक ऐसा एहसास है जो हमें काटने पर मजबूर कर देता है कभी-कभी हमें हैरत मे...
अयोध्या में मन रहा है प्राण प्रतिष्ठा का उत्सव राम मंदिर में भगवान रामलला की प्राण प्रतिष्ठा समारोह के अवसर पर रामनगरी में 22 जनवरी से पहले तीन प्रतिमाएं स्थापित किए जाने की तैयारी चल रही है। प्राण प्रतिष्ठा तक विभिन्न पूजन की तिथियां- अयोध्या में 18 जनवरी को लगभग एक बजे से गणपति पूजन किया जाएगा। इसके साथ ही जन्मभूमि मंदिर के गर्भगृह में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का प्रधान संकल्प लिया जाएगा। इसके साथ मात्रिका पूजन होगा। फिर पंचांग पूजन के बाद मंडप प्रवेश का आयोजन होगा। अयोध्या राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के अनुष्ठान के तहत 17 को महिलाओं ने कलश यात्रा भी निकाली । रामलला की अनुकृति का राम मंदिर परिसर में प्रवेश कराया गया। यह अनुकृति दस किलो की है। असली रामलला की मूर्ति का वजन ज्यादा होने के कारण इस छोटी मूर्ति का नगर भ्रमण और मंदिर प्रवेश कराया गया है। देर शाम रामलला की असली मूर्ति भी राममंदिर पहुंच गई। आज यानी 18 जनवरी रामलला गर्भगृह में पहुंच जाएंगे। इससे पहले यज्ञ मंडप के 16 स्तंभों और चारों द्वारों का पूजन भी हुआ। बताया गया है कि 1...
Introduction India is a land where every festival has a story of values, courage, and inspiration. Of all of them, Bandi Chhor Divas occupies a special place in Sikh history. In the year 2025, this sacred day will coincide on 20th October, coinciding with the festival of Diwali. Bandi Chhor Divas is not just lights and happiness—it is freedom, justice, and compassion. The History Behind Bandi Chhor Divas Bandi Chhor Divas is celebrated by the time of Guru Hargobind Sahib Ji, the sixth Sikh Guru. Guru Ji had been imprisoned by the Mughal emperor Jahangir at the Gwalior Fort on political and religious charges. When the emperor offered to release him, Guru Ji imposed a condition on him—he would not depart unless the 52 Hindu kings (rajahs), who were also in prison, were set free. Jahangir accepted ,but on the stipulation that only those who could physically cling to Guru Ji could depart with him. To see all of them freed, Guru Ji instructed a cloak to be sewn with 52 tassels, one for...
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