क्या लॉक डाउन आगे बढ़ना चाहिए या नहीं ?
आज एक बार फिर चर्चा कोरोना वायरस पर करते है, लगातार बढ़ते आकड़े देश के लिए एक चिंता जनक परिस्थितियां खड़ी करते जा रहे है। आज इस लेख लिखते वक्त कोरोना के संक्रमित मरीजों की संख्या 5194 तक पहुंच गई और मौत का आंकड़ा 149 तक , हालांकि संतोष जनक बात ये है की इसमें 402 मरीज ऐसे है जो ठीक होकर अपने घर वापस जा चुके है। सरकार भी देश को इस महामारी से बचाने लिए जरुरी कदम उठा रही है, जिसमें लॉक डाउन मुख्यता सबसे अहम है देश के मौजूदा आर्थिक हालात को देखते हुए सरकार का ये फैसला दिल पर पत्थर रखने की कहावत को अमली जामा पहनाने जैसा है। 21 दिन का लॉक डाउन कुछ दिनों खत्म होने की कगार पर है कयास बाजी और अटकले इसके आगे बढ़ने की भी तेजी से शुरू हो गई है, तो ऐसे में सवाल ये उठता है की क्या लॉक डाउन की अवधि बढ़ानी चाहिए या नहीं। तो इसके लिए दो पहलुओं को ध्यान में रख कर निर्णय लिया जा सकता है पहला महामारी को देखते हुए अगर इस लिहाज से देखा जाए तो लॉक डाउन को और आगे बढ़ाने की जरूरत है और दूसरा देश की अर्थ व्यवस्था के मद्देनज़र ये फैसला लेना थोड़ा सा कठिन है।
इस बात को तर्क देता है सोशल मीडिया प्लाट फ्रॉम पर लिखा गया भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम जी राजन का एक लेख वो अपने लेख में लिखते है की भारतीय इकॉनमी आज़ादी के बाद से सबसे बड़ी इमरजेंसी का सामना कर रही है. 2008-09 की मंदी से भी खराब हालात है. मंदी के दौरान वर्कर्स कम से कम काम करने के लिए बाहर निकल सकते थे. लेकिन कोरोना काल में ऐसा कुछ भी नहीं हो पा रहा। इसके बाद वो लिमिटेड राजकोष को लेकर चिंता जताते है , इतना ही नहीं वो लॉक डाउन के दौरान उतपन होने वाली इकोनॉमिक क्राइसिस से लड़ने के लिए कुछ सुझाव भी देते है, अगर उनकी माने तो लॉक डाउन के रहते हम अपने देश की अर्थ व्यवस्था में तेजी ला सकते है लेकिन उसके लिए हमे कुछ एतियात बरतने होंगे । अगर मानवता के आधार पर देखा जाये तो इस वक्त देश वाशियो की सुरक्षा सरकार की पहली प्राथमिकता है क्योकि अर्थ व्यवस्था की चिंता करने वाले देशो की हालत हमने देख ली है की किस तरह से उन देशो इस वक्त लाशे बिस्तरों की तरह से बिछी हुई है, देश के प्रधानमंत्री अपने ही लिए गए फैसले पर पचता रहे है। दुनिया का सबसे खूबसूरत शहर भी अपनी याद के सबसे बुरे दिन गुजार रहा है, इस लिए एक भारतीय होने के कारण हमे आपने आप को और पुरे देश वाशियो को बचाना हमारी प्रथिमिक्ता है और साथ ही साथ सरकार के द्वारा देश कल्याण में लिए गए सख्त फैसलो को आज्ञा के तौर पर पालन करना हमारी जिम्मेदारी, तो ऐसे में सरकार द्वारा लॉक डाउन को बढ़ाने का फैसला हमारे लिए सर्वोपरी है इस संकट के समय में सरकार जो भी फैसला लेती है उसका पालन करना हमारी जिम्मेदारी है और तभी हम इस कोरोना जैसी महामारी को हरा कर अपनी पुरानी पहचान वापस पा सकते है।
Manav kapil
Bjmc- ii
इस बात को तर्क देता है सोशल मीडिया प्लाट फ्रॉम पर लिखा गया भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम जी राजन का एक लेख वो अपने लेख में लिखते है की भारतीय इकॉनमी आज़ादी के बाद से सबसे बड़ी इमरजेंसी का सामना कर रही है. 2008-09 की मंदी से भी खराब हालात है. मंदी के दौरान वर्कर्स कम से कम काम करने के लिए बाहर निकल सकते थे. लेकिन कोरोना काल में ऐसा कुछ भी नहीं हो पा रहा। इसके बाद वो लिमिटेड राजकोष को लेकर चिंता जताते है , इतना ही नहीं वो लॉक डाउन के दौरान उतपन होने वाली इकोनॉमिक क्राइसिस से लड़ने के लिए कुछ सुझाव भी देते है, अगर उनकी माने तो लॉक डाउन के रहते हम अपने देश की अर्थ व्यवस्था में तेजी ला सकते है लेकिन उसके लिए हमे कुछ एतियात बरतने होंगे । अगर मानवता के आधार पर देखा जाये तो इस वक्त देश वाशियो की सुरक्षा सरकार की पहली प्राथमिकता है क्योकि अर्थ व्यवस्था की चिंता करने वाले देशो की हालत हमने देख ली है की किस तरह से उन देशो इस वक्त लाशे बिस्तरों की तरह से बिछी हुई है, देश के प्रधानमंत्री अपने ही लिए गए फैसले पर पचता रहे है। दुनिया का सबसे खूबसूरत शहर भी अपनी याद के सबसे बुरे दिन गुजार रहा है, इस लिए एक भारतीय होने के कारण हमे आपने आप को और पुरे देश वाशियो को बचाना हमारी प्रथिमिक्ता है और साथ ही साथ सरकार के द्वारा देश कल्याण में लिए गए सख्त फैसलो को आज्ञा के तौर पर पालन करना हमारी जिम्मेदारी, तो ऐसे में सरकार द्वारा लॉक डाउन को बढ़ाने का फैसला हमारे लिए सर्वोपरी है इस संकट के समय में सरकार जो भी फैसला लेती है उसका पालन करना हमारी जिम्मेदारी है और तभी हम इस कोरोना जैसी महामारी को हरा कर अपनी पुरानी पहचान वापस पा सकते है।
Manav kapil
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