राम का असली वंशज कौन?
रामायण देख रहे ढेरों लोगों के मन में ये प्रश्न हैै। वो जो सवाल पूछते हैं और वो जो नहीं पूछते-- जवाब दोनों को चाहिये। लेकिन जवाब ढूंढने से पहले एक बार खुद से पूछिए -- राम को आप क्यों चाहते हैं? इसलिए कि वो किसी खास कुल में जन्मे थे? इसलिए कि वो दशरथ के पुत्र थे? इसलिए कि वो अयोध्या के राजा थे? या इसलिये कि बचपन में मास्टर साहब ने बताया था कि इनको देख के प्रणाम करना है - तो आज तक किये जा रहे हैं?
आप जानते हैं-- शक्ति बहुतों के पास थी, राजा-अजेय योद्धा बहुत हुए, खास कुल या जाति का घमंड पालने वाले, पूरी दुनिया को अपनी ताकत से रौंद देने वाले, अथाह संपत्ति से सुख का चरम भोगने वाले कुबेर भी अनगिनत हुए, लेकिन राम सिर्फ एक हैं।
महर्षि वात्मिकी के रामायण और तुलसीदास कृत श्रीरामचरितमानस के माध्यम से हमारे सामने जो राम प्रकट होते हैं वो किसी एक परिवार, एक कुल, एक जाति या एक राज्य के हो ही नहीं सकते। इसीलिये भारत की सीमाओं के बाहर भी राम पूज्य हैं, प्रिय हैं, प्रेरक हैं। आज लौकिक रूप से दृश्यमान न होने पर भी राम को देखा जाता है- पिता पुत्र में, भाई भाई में, मित्र मित्र में व प्रजा अपने राजा में राम के दर्शन करना चाहती है, करती है। पूरी दुनिया में उनके उपासक हैं, विभिन्न भाषाओं में अनुवादित उनके जीवन प्रसंग को विश्व के कोने-कोने में पढ़ा--सुना-कहा जाता है, वहां भी जहां हिंदू बहुत कम संख्या में हैं।
आज राजा राम हमारे सम्मुख नहीं,लेकिन जनता के दिलों पर तो अब भी उनका राज है। ये सिर्फ किसी प्रदेश का शासक होने, प्रतापी होने, अजेय धनुर्धर होने से संभव नहीं हो सकता था।
राम तो गुणों का समुच्चय हैं, मानवता के रक्षक हैं, मर्यादा के पालक हैं, आदर्शों के वाहक हैं, धर्म ध्वजा के धारक हैं, शोषितों के उद्धारक हैं, प्रजा वत्सल हैं, पुरुषों में उत्तम हैं, राजाओं में सर्वोत्तम हैं, संवेदना के पुंज हैं, परम् प्रतापी मगर कोमल भावनाओं वाले हैं। राम सबको मान देने वाले, सबको साथ लेकर चलने वाले, प्रजा हित के लिए व्यक्तिगत हितों की आहुति दे देने वाले और लोक कल्याण के लिए सदैव अपने जीवन को दांव पर लगाने को तैयार हैं। वो वन में बिन राजमुकुट भी राजा हैं और महल में तमाम विलासिताओं के बीच भी वनवासी। जिस राम को हम जानते हैं वो अपने कुल से नहीं, कर्मों की वजह से राम हैं, व्यवहार में अतुल्य हैं, इसलिए अमर हैं।
अतः राम का वंशज कहलाने का अधिकार सिर्फ उसे है जो इन समस्त गुणों को धारण करता हो फिर चाहे वो किसी भी कुल में जन्मा हो। इसीलिए राम और कृष्ण दोनों को एक ही ईश्वरीय सत्ता का अंश माना गया, जबकि दोनों अलग काल में अलग कुल में पैदा हुए। ईश्वर के विभिन्न अवतारों को देखिए, वो एक ही कुल या परिवार में जन्म नहीं लेते, न लेंगे।
अतः कुल-खानदान-परिवार को मत खोजिये, परिवार की पूजा से देश व समाज का भला नहीं होता।
Divyansh Yadav
Mjmc-ii

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